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Title

Ishtopdesh Gatha 05

स्वर्ग सुख का कथन

हृषीकज –मनातक्ङं दीर्घ कालोपलालितम् ।

नाके नाकौकसां सौख्यं नाके नाकौकसामिव ॥५॥

इन्द्रियजन्य नीरोगमय, दीर्घकाल तक भोग्य।

स्वर्गवासि देवानिको, सुख उनहीके योग्य॥५॥

अर्थ – स्वर्ग में निवास करने वाले जीवों को स्वर्ग में इन्द्रिय जनित वैसा ही सुख होता है, जैसा कि स्वर्ग में रहने वाले देवों को हुआ करता है, अर्थात स्वर्ग में रहने वाले देवों का ऐसा अनुपमेय (उपमा रहित) सुख हुआ करता है कि उस सरीखा अन्य सुख बतलाना कठिन ही है। उन्नत विमान, सुन्दर वातावरण, मनोहारी देव-देवियाँ और निरोगी शरीर; यह सब इन्द्रिय जनित सुख ही हैं। जो किसी राजा व शत्रु इत्यादि के द्वारा हरण को प्राप्त नहीं होता अर्थात यह सुख सर्व प्रकार के आतंक अर्थात भय से रहित है तथा भोगभूमि की भाँति अल्पकालीन नहीं अपितु यह सुख तो सागरोपम काल तक बने रहने वाला है।

Series

Ishtopdesh

Category

Paintings

Medium

Acrylic on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Portrait

Artist

Manoj Sakale

Completion Year

01-May-2023

Gatha

5