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Title

Bhavna Battisi - Shlok no.2

यह अनन्त बल-शील आतमा, हो शरीर से भिन्न प्रभो।

ज्यों होती तलवार म्यान से, वह अनन्त बल दो मुझको॥२॥

हे भगवान! जैसे तलवार म्यान से पूर्णतया पृथक्‌ होने के कारण सरलता, सहजता से पृथक्‌ हो जाती है; उसीप्रकार मुझे वह अनन्त आत्म-सामर्थ्य/स्व-पर भेदविज्ञान के बल पर अनंत पदार्थों में से स्वयं को पूर्णतया पृथक्‌ करने की सामर्थ्य प्राप्त हो, जिससे मैं अपने अनन्त वैभव सम्पन्न आत्मा को इस शरीर से श्रद्धा, ज्ञान, चारित्र रुप में पूर्णतया पृथक्‌ कर सकूँ। २

Series

Bhavna Battisi

Category

Paintings

Medium

Acrylic on Canvas

Size

36" x 24"

Orientation

Landscape

Completion Year

31-Dec-2021

Shlok

2