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हाय! बड़े दुःख की बात है कि - संसार रूपी कत्लखाने में पापी और क्रोधी ऐसे इन्द्रिय-विषयरुप चाण्डालों ने चारों ओर राग-रूप भयंकर अग्नि सुलगा रखी है, ताकि चारों ओर से भयभीत हुए तथा अत्यन्त व्याकुल हुए पुरूष रूपी हिरन अपने बचाव के लिये अन्तिम शरण चाहते - ढूंढते हुए काम रूपी चाण्डाल ने बना रखे स्त्री रूप कपट स्थान में (फन्दे में) जा-जाकर फँस जाते हैं।
क्रमांक २७३. श्री आत्मानुशासन
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Bol