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Title

Shree Gyanarnav - Bol 240

जैसे रेशम का कीड़ा अपने ही मुख से तारों को निकाल कर अपने को ही उसमें आच्छादित कर लेता है, उसी प्रकार हिताहित में विचारशून्य होकर यह गृहस्थजन भी अनेक प्रकार के आरंभों से पाप उपार्जन करके अपने को शीघ्र ही पाप-जाल में फँसा लेते हैं।

क्रमांक २४०. श्री ज्ञानार्णव

Series

Vairagya Varsha

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Artist

Riaz Samadhan

Completion Year

14-Dec-2017

Bol

240