Exhibits

Title

Dhrashti Na Nidhan - Bol 122

कहीं रुकना नहीं। विकल्प का कुछ भी खटक बना रहेगा तब तक भीतर नहीं जा सकेगा। इस समय जवानी है इसलिए कमाई कर लूँ   - यह बात रहने दे भाई ! मौत सिर पर नौबत बजा रही है। फिर करूँगा, फिर करूंगा; ऐसा रहने दे। अंतर में कोई भी विकल्प रहेगा कि यह कर लूँ..... यह कर लूँ..... ऐसे वादे करेगा तो भीतर नहीं जा सकेगा।

क्रमांक १२२. दृष्टि के निधान

Series

Vairagya Varsha

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Artist

Riaz Samadhan

Completion Year

24-Mar-2021

Bol

87