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Title

Aatmanu shashan - Bol 5

यह जगत इन्द्रजाल तथा कदली-स्तंभ के समान केवल निःसार है, यह क्या तू नहीं जानता ? नहीं सुना ? अथवा प्रत्यक्ष नहीं दिखता ? हे जीव ! आप्तजनों की मृत्यु के पीछे शोक करना, वह निर्जन वन में टेर लगाने समान व्यर्थ है। जो उत्पन्न हुआ है वह मरेगा ही। मृत्यु के समय उसे कौन बचा सके ऐसा है? तथापि मूर्ख मनुष्य सम्बन्धिजनों की मृत्यु के पीछे शोक करते हैं यही अनादिकालीन मोह का पागलपन है।

क्रमांक ५. श्री आत्मानुशासन

Series

Vairagya Varsha

Category

Paintings

Medium

Oil on Canvas

Size

36" x 48"

Orientation

Landscape

Artist

Riaz Samadhan

Completion Year

07-Jan-2019

Bol

5