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साधक दशा में शुभ भाव बीच में आते हैं, परन्तु साधक उन्हें छोड़ता जाता है; साध्य का लक्ष नहीं चूकता।- जैसे मुसाफिर एक नगर से दूसरे नगर जाता है तब बीच में अन्य-अन्य नगर आयें उन्हें छोड़ता जाता है, वहाँ रुकता नहीं है; जहाँ जाना है वहीं का लक्ष रहता है।
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Bol