Exhibits

Title

Bhranti Khandan Example

भ्रान्ति खण्डन दृष्टांत

स्वस्वरूप समभाव में, नहीं भरम को अंश।

धर्मदास क्षुल्लक कहै, सुन चेतन निरवंश॥

जिसप्रकार किसी व्यक्ति ने गले में बहुमूल्य मोतियों की माला पहनी हो परन्तु अज्ञानता अथवा भ्रम के कारण उसे अपने पास दिखाई नहीं दे रही अथवा उसे माला स्वयं के पास होने का विचार भी नहीं आ रहा है, तो वह उस माला को सब जगह खोजता है लेकिन वास्तव में तो वह माला उसी के पास है। उसी प्रकार जीव जिस सुख की खोज अनादि से पर-वस्तु में कर रहा है, वह उसी के अंतरंग में विद्यमान है। वह किसी वस्तु-विशेष अथवा स्थान विशेष में नही, यदि एक बार स्वभाव का निर्णय करे तो उसका हित अवश्य होगा।

Series

Samyakgyan Deepika

Category

Paintings

Medium

Charcoal on Paper

Size

24" x 30"

Orientation

Landscape

Artist

Yuvraj Patil

Completion Year

10-Jun-2019