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Title

Gotra Karma

गोत्रकर्म

गोत्रादिक सब कर्मको, त्याग भये जिनराज।

धर्मदास क्षुल्लक कहै, वंदन सुखके काज॥

जिसप्रकार घडे का निर्माता कुम्हार मिट्टी, दण्ड, चक्र इत्यादि द्वारा मिट्टी के छोटे-बडे बर्तन बनाता है, उसीप्रकार इस गोत्रकर्म के द्वारा जीव उच्च-नीच गोत्र को प्राप्त होता है। परन्तु वास्तव में तो आत्मा को कोई गोत्र नहीं, वह तो इनसे भिन्न है।

Series

Samyakgyan Deepika

Category

Paintings

Medium

Charcoal on Paper

Size

24" x 30"

Orientation

Landscape

Artist

Yuvraj Patil

Completion Year

03-Apr-2018